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मेरे, आपके, सबके सपनो का शहर
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सवाल: क्या हम अपने शहर इटारसी की लड़खड़ाती परिस्थिति को संभाल लेंगे या फिर हमारा इटारसी लड़खड़ा कर गिर पड़ेगा? और मैं यह सवाल सिर्फ इसलिए खड़ा कर रहा हूं क्योंकि हम यह जानते ही नहीं कि हमारे शहर के विकास का हमारे लिए क्या अर्थ है। हम मॉल, अपार्टमेंट और सीमित हरियाली आदि की चकाचौंध के आगे कुछ नहीं देख पाते। न तो हम यह जानते हैं और न ही यह जानने की कोशिश करते हैं कि इतने लोगों को पानी कैसे देंगे? सबके लिए घर कैसे बनाएँगे? सीवेज ट्रीटमेंट कैसे होगा? हर रोज बढ़ते गाड़ियों के कारवां के लिए इतनी पार्किंग कहां से आएगी? और फिर हर रोज अपने ही शहर में कूड़े के जो पर्वत पैदा करते है, उनका क्या होगा? शायद हमने यह सोच रखा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के पास इन सारी समस्याओं की कुंजी है, और हमें उम्मीद है हम जो विभिन्न प्रकार के टैक्स "जन-धन" के रूप में सरकार को देते है उससे मिली राशि से इटारसी की समस्याओं का हल चुटकियों में हो जाएगा। पर सच्चाई इससे अलग भी है और कड़वी भी। सच यह है कि सही विकास शहर का वह चेहरा है जिसके लिए सही योजनाकार, ढेर सारे संसाधनों व पूँजी के साथ साथ शहर के रहवासियो की सहभागित...
पहली पोस्ट: इटारसीनामा
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लेखक:
इटारसीनामा
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आपका इटारसीनामा पर हार्दिक स्वागत है !! इटारसी के चाहने वालो के लिए एक वेब कोना है आप इस पेज पर आये है यानी आप भी इटारसी के चाहने वाले है भारत के मध्य प्रान्त के मध्य भाग में नर्मदा के समीप बस छोटा सा शहर इटारसी विध्यांचल और सतपुड़ा पर्वत माला के बीच बस हुआ है. इटारसीनामा इस शहर से सम्बंधित हर जानकारी, समाचार, गतिविधियों को संग्रहित करने के साथ साथ शहर की समस्याओ की आवाज़ बनने का एक प्रयास है.